निम्बाहेड़ा में सियासी संग्राम चरम पर: दो पूर्व मंत्री आमने-सामने, विकास और भ्रष्टाचार पर खुली चुनौती

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Political battle reaches its peak in Nimbahera: Two former ministers face off, openly challenging each other on development and corruption

चित्तौड़गढ़। निम्बाहेड़ा की राजनीति में इन दिनों दो दिग्गज नेताओं के बीच तीखा टकराव खुलकर सामने आ गया है। भारतीय जनता पार्टी से मंत्री रह चुके और वर्तमान विधायक श्रीचंद कृपलानी तथा कांग्रेस से पूर्व सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना एक-दूसरे पर विकास कार्यों और भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर आरोप लगा रहे हैं।

“कृपलानी के भाषण झूठ का पुलिंदा” : आंजना

कांग्रेस कार्यालय से जारी बयान में उदयलाल आंजना ने कृपलानी के हालिया भाषणों को “झूठ का पुलिंदा” बताया। उन्होंने कहा कि बजट घोषणाओं को भी झूठा बताना जनता को गुमराह करने का प्रयास है। आंजना ने दावा किया कि निम्बाहेड़ा–मंगलवाड़ रोड की स्वीकृति वर्ष 2023-24 के बजट में तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा दी गई थी, जिसमें कुल 200.50 करोड़ रुपये की वित्तीय मंजूरी जारी की गई थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि बिना भूमि अवाप्ति के कार्य शुरू कर वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश की जा रही है। आंजना ने कहा कि यदि उनकी योजना को आचार संहिता से पहले स्वीकृति मिल जाती तो डेढ़ वर्ष में सड़क निर्माण पूरा हो सकता था।

20 साल से बारी-बारी सत्ता में, फिर भी आरोप क्यों?
राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय यह है कि पिछले लगभग दो दशकों से निम्बाहेड़ा की जनता कभी कृपलानी तो कभी आंजना को चुनती रही है। प्रदेश में भाजपा की सरकार आती है तो श्रीचंद कृपलानी विधायक होते हैं, और कांग्रेस की सरकार बनती है तो उदयलाल आंजना क्षेत्र का नेतृत्व करते हैं।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब दोनों नेताओं को अलग-अलग समय में सत्ता और अवसर मिले हैं, तो फिर विकास कार्यों को लेकर एक-दूसरे पर लगातार

आरोप क्यों लगाए जा रहे हैं?
भ्रष्टाचार के आरोप और जांच की चुनौती
वर्तमान में प्रदेश में भाजपा की सरकार है और श्रीचंद कृपलानी विधायक हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि कांग्रेस शासनकाल में आंजना के कार्यकाल में कोई भ्रष्टाचार हुआ है, तो मौजूदा विधायक के रूप में कृपलानी को निष्पक्ष जांच करवानी चाहिए।
दूसरी ओर, यदि कृपलानी के पूर्व कार्यकाल में कोई अनियमितता हुई है, तो आंजना को भी उसके प्रमाण प्रस्तुत कर जांच की मांग करनी चाहिए।

आंजना ने सार्वजनिक रूप से कृपलानी को खुली चुनौती देते हुए कहा है कि दोनों के कार्यकाल में हुए विकास कार्यों की उच्च स्तरीय अथवा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) से जांच करवा ली जाए, ताकि जनता के सामने सच्चाई आ सके। उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यकाल में कृपलानी से अधिक विकास कार्य हुए और पारदर्शिता के साथ योजनाएं लागू की गईं।

मूर्तियां, जमीन आवंटन और राजनीतिक आरोप

आंजना ने नगर परिषद क्षेत्र में मूर्तियों की स्थापना और जमीन आवंटन मामलों में भी अनियमितताओं के आरोप लगाए। वहीं कृपलानी पूर्व सरकार के समय हुए कार्यों पर सवाल उठा चुके हैं। दोनों नेताओं के बीच यह आरोप-प्रत्यारोप अब व्यक्तिगत और राजनीतिक दोनों स्तरों पर तीखा होता जा रहा है।

जनता के सामने बड़ा सवाल

निम्बाहेड़ा की जनता के बीच यह सवाल गूंज रहा है कि जब दोनों नेता वर्षों से क्षेत्र की राजनीति के केंद्र में हैं और अलग-अलग समय में सत्ता में रहे हैं, तो विकास के मुद्दों पर यह टकराव आखिर क्यों?
अब देखना यह होगा कि यह सियासी जंग केवल बयानबाजी तक सीमित रहती है या वास्तव में किसी स्वतंत्र जांच की पहल होती है। फिलहाल निम्बाहेड़ा में विकास बनाम भ्रष्टाचार की बहस ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है।

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Author: chittorgarhnews

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