Drone attack on Saudi Aramco’s Ras Tanura refinery sends global oil market into a tizzy

रियाद/तेहरान, सोमवार।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी Saudi Aramco की पूर्वी प्रांत स्थित रास तनूरा रिफाइनरी पर ड्रोन हमला किया गया। हमले के बाद एहतियातन रिफाइनरी को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा। रास तनूरा सऊदी अरब के प्रमुख रिफाइनिंग हब में शामिल है और यहां प्रतिदिन लाखों बैरल कच्चे तेल का प्रसंस्करण होता है।
सऊदी अधिकारियों के अनुसार, हमले से ऊर्जा ढांचे को संभावित खतरे को देखते हुए सुरक्षा उपाय बढ़ा दिए गए हैं। प्रारंभिक जानकारी में बड़े पैमाने पर जनहानि की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने की आशंका से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखा गया।

यूएस इजरायल के संयुक्त हमल के बाद ईरान की जवाबी कार्यवाही
माना जा रहा है कि अमेरिका को ईरान पर हमला करने के लिए सऊदी अरब की क्राउन प्रिंस ने भी कई बार कहा है इसके बाद ईरान – इजरायल केबीच तनाव के बाद अमेरिका ने इजरायल के साथ देकर ईरान पर हमला किया। हमला ऐसे समय हुआ है जब Iran, United States और Israel के बीच सैन्य टकराव की स्थिति बनी हुई है। हाल के दिनों में अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर हमलों के बाद तेहरान ने जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी थी। विश्लेषकों का मानना है कि सऊदी के ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाना उसी रणनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा हो सकता है।
वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर
रास तनूरा विश्व के प्रमुख तेल निर्यात टर्मिनलों में से एक है। यहां उत्पादन या निर्यात में बाधा आने पर एशिया और यूरोप के बाजारों पर सीधा असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि स्थिति लंबी खिंचती है तो वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है और तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है।
पाकिस्तान की स्थिति पर नजर
घटनाक्रम के बीच Pakistan की भूमिका पर भी चर्चा तेज हो गई है। पिछले वर्ष सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच एक महत्वपूर्ण रक्षा समझौता हुआ था, जिसमें किसी एक देश पर हमला दोनों पर हमला माना जाएगा। हालांकि मौजूदा हमले पर पाकिस्तान की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
सऊदी अरब ने हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि वह अपनी सुरक्षा और ऊर्जा ढांचे की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगा। वहीं अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने संयम बरतने और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने की अपील की है।
मध्य पूर्व में बढ़ता यह संघर्ष अब केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिए भी गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।
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