करीब दो वर्ष पुराने अपहरण एवं दुष्कर्म प्रकरण में विशेष न्यायालय ने सुनाई सजा, दोनों आरोपियों पर कुल 6.80 लाख रुपए का जुर्माना।

चित्तौड़गढ़, 4 जून। विशेष न्यायालय लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (पोक्सो)-2 की न्यायाधीश शहनाज परवीन ने करीब दो वर्ष पुराने नाबालिग अपहरण एवं दुष्कर्म मामले में दो आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 20-20 वर्ष के कठोर कारावास एवं कुल 6 लाख 80 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है।
विशेष लोक अभियोजक शिवराज सिंह एवं पीड़िता पक्ष के अधिवक्ता गुलशेर अली सैय्यद ने बताया कि 8 मई 2024 को भदेसर थाने में एक व्यक्ति ने अपनी कक्षा आठवीं में अध्ययनरत नाबालिग पुत्री के स्कूल जाते समय अपहरण होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मामले की जांच तत्कालीन थाना प्रभारी रविंद्र सेन ने करते हुए शुभम माली निवासी कन्नौज को गिरफ्तार कर उसके विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक शिवराज सिंह तथा पीड़िता पक्ष की ओर से अधिवक्ता गुलशेर अली सैय्यद एवं यास्मीन शेख ने प्रभावी पैरवी की। न्यायालय ने प्रस्तुत साक्ष्यों एवं दस्तावेजों के आधार पर एक अन्य आरोपी मुकेश आचार्य निवासी कन्नौज की भूमिका भी प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाते हुए उसके विरुद्ध प्रसंज्ञान लेकर आरोप तय किए।
अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत 18 गवाहों, 39 दस्तावेजों एवं दो भौतिक साक्ष्यों के आधार पर विशेष न्यायालय ने दोनों आरोपियों को अपहरण एवं दुष्कर्म का दोषी माना।
न्यायालय ने दोनों आरोपियों को विभिन्न धाराओं में सजा सुनाते हुए भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं एवं पोक्सो एक्ट के तहत 20-20 वर्ष के कठोर कारावास के साथ कुल 6 लाख 80 हजार रुपए का जुर्माना लगाया।
इस प्रकरण की विशेष बात यह रही कि पुलिस ने प्रारंभ में केवल एक आरोपी के विरुद्ध चालान पेश किया था, लेकिन न्यायालय ने अभियोजन पक्ष की दलीलों एवं उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दूसरे आरोपी को भी दोषी मानते हुए सजा सुनाई।
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