नारकोटिक्स की कार्रवाई से अफीम किसानों में रोष, तौल तक दबिश रुके – चौधरी

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Narcotics checks at opium farmers’ homes spark anger, demand to end raids even on weighing grounds

चित्तौड़गढ़। जिले में लाइसेंसधारी अफीम किसानों के घरों पर नारकोटिक्स विभाग द्वारा लगातार की जा रही चेकिंग को लेकर किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। किसानों का कहना है कि नियमों के अनुसार खेती करने के बावजूद जांच के नाम पर बार-बार परेशान किया जा रहा है।

किसान नेता राहुल चौधरी चिकसी ने कहा कि अफीम की रोजाना जो एंट्री की जाती है वह ताजा अफीम की होती है, जिसमें कई बार लगभग आधा हिस्सा पानी का होता है। बाद में सूखने की प्रक्रिया के दौरान वजन कम होना स्वाभाविक है, लेकिन विभाग इस अंतर को आधार बनाकर किसानों पर अनावश्यक दबाव बना रहा है और कई मामलों में किसानों पर केस तक दर्ज किए जा रहे हैं।

 

काल्पनिक चित्रण

 

अनावश्यक दबिश पर रोक: किसानों की मांग है कि अफीम की लुआई-चिराई से लेकर तौल (वजन) होने तक उनके घरों पर छापेमारी और दबिश को पूरी तरह बंद किया जाए।

वजन में अंतर का वैज्ञानिक कारण: ताजा अफीम में पानी की मात्रा अधिक होती है। सूखने के बाद वजन कम होना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन विभाग इस अंतर को आधार बनाकर किसानों पर मुकदमे दर्ज कर रहा है, जिसे किसान अनुचित दबाव मान रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अफीम की खेती में किसानों को काफी मेहनत और खर्च करना पड़ता है। ऐसे में किसानों को तौल तक शांति से अपना काम करने दिया जाना चाहिए।
चौधरी ने मांग की कि यदि विभाग को किसी प्रकार का संदेह है तो रोजाना उत्पादित अफीम का संग्रह कर लिया जाए, लेकिन तौल तक किसानों के घरों पर अनावश्यक दबिश देकर उन्हें परेशान नहीं किया जाए।

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Author: chittorgarhnews

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