A panther hunted a Nilgai near Hanuman Pole in fort
चित्तौडगढ़। दुर्ग पर बुधवार देर रात एक वयस्क पैंथर की हलचह ने दुर्ग वासियों को दहशत में डाल दिया। पैंथर आधी रात में करीब 3ः30 बजे हनुमान पोल के पास नजर आया, जिसकी हलचल दुर्ग पर तैनात सुरक्षा कर्मी महेंद्र कुमार धाकड़ ने देखी।

उन्होंने अपने एसआईएस सिक्योरिटी सुपरवाइजर देवेंद्र सिंह सोलंकी को सूचना दी। उन्होंने देखा कि पैंथर एक पेड़ के पास खड़ा है, जैसे ही वहां गाड़ी की हलचल हुई, वह धीरे-धीरे एक दीवार पर जाकर बैठ गया। सुपरवाइजर ने इस दृश्य को अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड भी कर लिया, जिससे पैंथर की मौजूदगी की पुष्टि हो सकी। गुरुवार सुबह जब कर्मचारी और गार्ड फिर से ड्यूटी के लिए दुर्ग लौटे, तो हनुमान पोल पर उन्हें एक मरी हुई नीलगाय दिखाई दी, जहां रात को पैंथर को देखा गया था। नीलगाय का पिछला हिस्सा खाया हुआ था, जिससे यह अनुमान लगाया गया कि यह शिकार उसी पैंथर ने किया होगा। इस घटना की जानकारी तुरंत वन विभाग को दी गई। नाकेदार झूमर राम ने विभाग की टीम को बुलाया। वन विभाग की टीम भी मौके पर पहुंच गई। नीलगाय के शव को मौके से हटाया गया ताकि दुबारा कोई जानवर वहां न पहुंचे। वन विभाग की टीम अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पैंथर किले में कैसे आया और क्या वह अभी भी आसपास कहीं छिपा तो नहीं है। साथ ही किले और उसके आस-पास की सुरक्षा व्यवस्था को भी अब और मजबूत किया जा रहा है, ताकि पर्यटकों और कर्मचारियों को किसी तरह का खतरा न हो।
आधी रात में दिखने लगे हिंसक वन्य जीव
दुर्ग के पीछे का क्षेत्र सूरजपोल वन क्षेत्र है, जहां घने वृक्ष होने से हिसंक वन्य जीव विचरण करते है। ऐसे मंे वन क्षेत्र से जानवर शिकार की तलाश में मोहर मगरी से होते हुए दुर्ग की तलहटी मंे घना जंगल होने से शहर की ओर आने लगे है। वन्य जीव विचरण करते हुए गांधीनगर से होते हुए दुर्ग की तलहटी क्षेत्र में पहुंच जाते है। पूर्व में भी आधी रात में इस क्षेत्र में जरख की हलचल देखने को मिली है। हालांकि इस क्षेत्र में पैंथर प्रजाति पहली बार नजर आई है। सूरजपोल क्षेत्र में पूर्व में पैंथर की हलचल के साथ ही बछड़े का शिकार की घटना सामने आ चुकी है। ऐसे में कयास लगाया जा रहा है कि सूरजपोल सहित आस-पास के वन क्षेत्र से यह पैंथर शिकार की तलाश मंे रात्रि में यहां पहुंच गया।
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