Passengers are troubled by the indefinite strike of private bus operators, the issue echoed in the Assembly

चित्तौड़गढ़। प्रदेश एवं देशभर में निजी बस ऑपरेटरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के चलते सड़कों पर यात्री भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं। चित्तौड़गढ़ में भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं। भीलवाड़ा, उदयपुर, कपासन, बेगूं, बस्सी सहित आंतरिक ग्रामीण क्षेत्रों में आने-जाने वाले लोग विशेष रूप से प्रभावित हुए हैं। बसों के बंद रहने से बस स्टॉप पर अवैध रूप से यातायात संचालित होने लगा है, जहां तीन पहिया ऑटो, निजी कारें एवं अन्य अवैध वाहन सवारियां ढोते नजर आ रहे हैं।
इसी बीच चित्तौड़गढ़ विधायक चंद्रभान सिंह आक्या ने गुरुवार को विधानसभा में इस गंभीर मुद्दे को उठाते हुए सरकार से शीघ्र समाधान की मांग की।
विधायक आक्या ने राजस्थान विधानसभा के प्रक्रिया एवं कार्यसंचालन नियमों के नियम 50 के अंतर्गत स्थगन प्रस्ताव पर बोलते हुए कहा कि हड़ताल के कारण प्रदेश की लगभग 30 हजार निजी बसें बंद हो गई हैं। सामान्य दिनों में करीब 33 हजार निजी बसें संचालित होती हैं, जबकि वर्तमान में यात्रियों को मात्र तीन हजार रोडवेज बसों के भरोसे छोड़ दिया गया है।
उन्होंने कहा कि प्रतिदिन लाखों मजदूर, विद्यार्थी, शहरी एवं ग्रामीण यात्री निजी बसों से आवागमन करते हैं। हड़ताल के कारण आमजन, रोजगार एवं पर्यटन सभी प्रभावित हो रहे हैं। चित्तौड़गढ़ से सांवरिया जी मंदिर, आवरी माता मंदिर एवं जोगनिया माता मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं को भी भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
आक्या ने आरोप लगाया कि आरटीओ, डीटीओ व परिवहन विभाग द्वारा निजी बस संचालकों पर एक से दो लाख रुपये तक के भारी-भरकम चालान बनाए जा रहे हैं तथा धारा 153 और 119 का हवाला देकर उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है।
अवैध यातायात पर सवाल
हड़ताल के बाद कई मार्गों पर अवैध यातायात बढ़ गया है। बस स्टॉपों से तीन पहिया ऑटो, निजी कारें एवं अन्य अवैध वाहन खुलेआम सवारियां भरकर संचालित हो रहे हैं। चित्तौड़गढ़ पंचायत समिति के बाहर बने बस स्टॉप से भीलवाड़ा के लिए एक निजी वैन द्वारा अवैध रूप से यातायात संचालित किया जा रहा है।
जो परिवहन विभाग टैक्स देने वाली निजी बसों पर सख्ती कर रहा है, वही विभाग एवं आरटीओ निरीक्षक ऐसे अवैध रूप से संचालित वाहनों पर कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। इससे न केवल राजस्व का नुकसान हो रहा है बल्कि यात्रियों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ रही है।
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Author: Ilyas
पिछले 10 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता







