District level training organized for 100% target of birth-death and marriage registration

चित्तौड़गढ़, 20 फरवरी। सिविल रजिस्ट्रेशन प्रणाली के अन्तर्गत जन्म, मृत्यु एवं विवाह के शत-प्रतिशत पंजीयन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक दिवसीय जिला स्तरीय प्रशिक्षण का आयोजन शुक्रवार को निजी वाटिका में किया गया।
प्रशिक्षण में जिले की समस्त नगर परिषद/नगरपालिकाओं के रजिस्ट्रार, जिला चिकित्सालय, उप जिला चिकित्सालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों के उप रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु), संबंधित कार्मिक तथा निजी चिकित्सालयों में जन्म-मृत्यु पंजीयन कार्य से जुड़े कार्मिकों ने भाग लिया।
प्रशिक्षण के दौरान जिला रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) एवं उपनिदेशक आर्थिक एवं सांख्यिकी शबनम खोरवाल ने जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रकरण अधिनियम, 1969, जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रकरण (संशोधन) अधिनियम, 2023 तथा राजस्थान विवाहों का अनिवार्य रजिस्ट्रकरण अधिनियम, 2009 के प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जन्म, मृत्यु एवं विवाह का पंजीयन करवाना अनिवार्य है तथा पंजीयन हेतु आवश्यक दस्तावेज, समय-सीमा एवं पंजीयन के उपयोग की महत्ता से सभी सहभागियों को अवगत कराया।
उन्होंने विदेश में जन्मे बच्चों के पंजीयन, विधवा/विधुर के विवाह पंजीयन की प्रक्रिया एवं अन्य विशेष परिस्थितियों में पंजीयन से संबंधित प्रावधानों की जानकारी भी प्रदान की।
प्रशिक्षण के दौरान शुभम कुमार गुप्ता एवं बाबूलाल मीणा द्वारा बताया गया कि संस्थागत जन्म एवं मृत्यु के मामलों में शपथ पत्र/अनुज्ञा की आवश्यकता नहीं होती है। मृत्यु पंजीयन में मृत्यु का कारण प्रदर्शित करने हेतु संस्थागत घटनाओं में एमसीसीडी फॉर्म-4 तथा गैर-संस्थागत घटनाओं में एमसीसीडी फॉर्म-4(क) भरवाना आवश्यक है।
राज्य में लागू राजस्थान जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रकरण (संशोधन) नियम, 2025 के नियम 16(2) के अनुसार निजी/सार्वजनिक चिकित्सा संस्थानों द्वारा जन्म-मृत्यु पंजीयन में 21 दिवस से अधिक अकारण विलंब अथवा सूचना समय पर उपलब्ध नहीं कराने की स्थिति में 250 रुपये से 1000 रुपये तक की पेनल्टी लगाने का प्रावधान है। इस संबंध में निर्देशित किया गया कि विलंबित घटनाओं की सूचना जिला रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) कार्यालय को अनिवार्य रूप से प्रेषित की जाए, ताकि संबंधित संस्थानों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा सके।
प्रशिक्षण के दौरान सभी रजिस्ट्रार/उप रजिस्ट्रार को जन्म-मृत्यु एवं विवाह पंजिका रजिस्टरों को व्यवस्थित रूप से संधारित करने के भी निर्देश दिए गए।
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