रक्षाबंधन पर बहन की स्मृति में ‘एक रक्त बूंद बहन के नाम’ विशाल महा रक्तदान शिविर का आयोजन 3 को

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(इलियास मोहम्मद)

चित्तौड़गढ़, 31 जुलाई। रक्षाबंधन जैसे पवित्र पर्व पर चित्तौड़गढ़ में मानवता और भाई-बहन के रिश्ते की एक अनूठी मिसाल पेश की जा रही है। स्थानीय गुलशन वाटिका में 3 अगस्त को एक विशाल महा रक्तदान शिविर का आयोजन किया जा रहा है, जिसे “एक रक्त बूंद बहन के नाम” शीर्षक दिया गया है। यह आयोजन पवन शर्मा द्वारा उनकी दिवंगत बड़ी बहन स्वर्गीय चेतना शर्मा की स्मृति में किया जा रहा है, जिनका तीन वर्ष पूर्व एक सड़क दुर्घटना में असमय निधन हो गया था।

रक्तदान शिविर कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए संयोजक पवन शर्मा।

 

पवन शर्मा ने बताया कि वे अपनी बहन को तो नहीं बचा सके, लेकिन अब वे हर वर्ष रक्षाबंधन पर किसी सामाजिक और मानव सेवा के माध्यम से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। इस वर्ष उन्होंने रक्तदान शिविर के रूप में बहन को सच्ची श्रद्धांजलि देने का संकल्प लिया है। उनका मानना है कि एक रक्त की बूंद किसी ज़रूरतमंद के लिए जीवनदान बन सकती है और एक पूरे परिवार की दुनिया को रोशनी दे सकती है। यह पहल न केवल उनके निजी भाव से जुड़ी है, बल्कि समाज को भी रक्तदान के लिए प्रेरित करने वाली है।

शिविर में 1000 यूनिट रक्त संग्रह का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके लिए 50 बेड की व्यापक व्यवस्था की जा रही है। रक्षाबंधन के अवसर को ध्यान में रखते हुए शिविर में भाई-बहन की जोड़ी में रक्तदान करने वालों के लिए विशेष रूप से जोड़ वाले बेड लगाए जाएंगे, ताकि इस भावनात्मक रिश्ते की गरिमा को भी सम्मान मिल सके। आयोजन में चित्तौड़गढ़ और उदयपुर चिकित्सालय के डॉक्टर व मेडिकल स्टाफ रक्त संकलन के लिए मौजूद रहेंगे।

इस महा रक्तदान शिविर में सर्व समाज के लोग सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं। सभी धर्मों और वर्गों के भाई-बहन इस मुहिम में जुड़कर रक्तदान के प्रति जनजागरण का संदेश दे रहे हैं और इस पवित्र दिन को सेवा के माध्यम से सार्थक बना रहे हैं। शिविर को लेकर तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं और शहर में इसे लेकर सकारात्मक वातावरण बना है।

आयोजन से पूर्व गुरुवार शाम गुलशन वाटिका में प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया, जिसमें आयोजन समिति के सदस्य प्रशांत शर्मा, ओम प्रकाश उपाध्याय सहित विभिन्न समाजों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। पवन शर्मा ने अपील की है कि रक्षाबंधन के इस विशेष अवसर को हम सभी एक नई सोच और भावना के साथ मनाएं और रक्तदान करके किसी की जान बचाने का पुण्य कार्य करें। यह सच्ची श्रद्धांजलि होगी उस बहन के नाम, जिसने अब भी किसी अनजान की सांसों में अपनी उपस्थिति दर्ज करानी है।

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Ilyas
Author: Ilyas

पिछले 10 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता

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