तिरूपति स्वरूप में ठाकुरजी के दशर्न ने भक्तों का मनमोहा

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चित्तौड़गढ़। मेवाड़ के प्रसिद्ध श्री शेषावतार कल्लाजी वेदपीठ पर कातिर्क शुक्ला एकादशी के पावन अवसर पर यहां विराजित ठाकुरजी सहित पंचदेवों का श्रृंगार देखते ही बनता था। जहां ठाकुरजी को तिरूपति स्वरूप में सजाया गया। वहीं स्कंध माता, गायत्री माता, पंचमुखी हनुमानजी एवं काल भैरव की प्रतिमाओं का श्रृंगार भी आकषर्ण का केन्द्र बना रहा। वहीं देवोत्थापन एकादशी के उपलक्ष्य में ठाकुरजी को प्रथम बार तिरूपति बालाजी का स्वरूप धराया गया। उनकी यह मनमोहिनी छवि भक्तों के लिए आकषर्ण का केन्द्र बनी रही। प्रातरू श्रृंगार आरती से लेकर रात्रि शयन आरती तक सैकड़ों भक्तों ने अपने आराध्य की अनुपम छवि के दशर्न कर स्वयं को धन्य किया।

201 थाल में न्यौछावर किया छप्पनभोग

देवोत्थापन एकादशी के उपलक्ष्य में ठाकुरश्री कल्लाजी को 201 थाल में धराए गए छप्पनभोग की झांकी देखते ही बनती थी। श्रीनाथ जी एवं द्वारकाधीश को अपिर्त किए जाने वाले नानाविधभोग के रूप में पिछले तीन दिनों से तैयार की गई अनेक प्रकार की मिठाईयां, नमकीन व्यंजन, सूखे मेवे, मौसमी फल भेंट किए गए। जिनकी छप्पनभोग की झांकी आकषर्ण का केन्द्र रही।

ठाठ तो ठाकुरजी के अपने आराध्य के दशर्न करने आए कई कल्याण भक्तों ने ठाकुर जी की मनोहारी छवि के दशर्न करते हुए कहा कि ठाठ तो वास्तव में ठाकुरजी के है। कल्याण नगरी के राजाधिराज के रूप में उन्हें समय-समय धराए जाने वाले विभिन्न स्वरूपों की झांकी भक्तों के लिए आकषर्ण का केन्द्र बनती जा रही है। वहीं वेदपीठ के न्यासियों एवं कल्याण भक्तों की ओर से समय-समय पर आयोजित किए जाने वाले उत्सव एवं अन्य कायर्क्रमों से यहां की छवि देश के कोने-कोने तक पहुंचने लगी है।

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Author: chittorgarhnews

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