• सुबह 4 बजे से दुर्ग में घेराबंदी, 9 जेसीबी और 5 ट्रैक्टरों से दो मंजिला अवैध निर्माण ध्वस्त

• एएसआई सर्वे में 209 से अधिक अतिक्रमण चिन्हित, 2020 के बाद बने कमर्शियल निर्माण सबसे पहले निशाने पर
चित्तौड़गढ़, 14 जून। यूनेस्को विश्व धरोहर में शामिल ऐतिहासिक चित्तौड़गढ़ दुर्ग में अवैध निर्माणों और अतिक्रमणों के खिलाफ प्रशासन और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। एएसआई द्वारा किए गए विस्तृत सर्वे में दुर्ग क्षेत्र के भीतर 209 से अधिक आवासीय एवं व्यावसायिक अतिक्रमण चिन्हित किए गए हैं। इसके साथ ही हाल ही में दुर्ग क्षेत्र में बने एक बड़े अवैध दो मंजिला व्यावसायिक निर्माण को ध्वस्त कर प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि अब नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
कार्रवाई के तहत रविवार सुबह करीब 4 बजे से ही एएसआई, नगर परिषद और पुलिस की संयुक्त टीम ने दुर्ग क्षेत्र में मोर्चा संभाल लिया। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए रामपोल से राणा रतन सिंह महल तक का मार्ग बंद कर दिया गया तथा वाहनों की आवाजाही रोक दी गई। इसके बाद सुबह 5 बजे से अवैध निर्माण को ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू की गई।
करीब 0.14 हेक्टेयर एएसआई भूमि पर बने दो मंजिला अवैध निर्माण को हटाने के लिए 9 जेसीबी और 5 ट्रैक्टर लगाए गए। अधिकारियों की निगरानी में पूरे ढांचे को चरणबद्ध तरीके से तोड़ा गया और मलबे को मौके से हटाया गया
जानकारी के अनुसार यह विवाद वर्ष 2024 में सामने आया था, जब पुरातत्व विभाग की आपत्तियों के बावजूद संरक्षित क्षेत्र में निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया। चेतावनियों और नोटिसों के बावजूद निर्माण कार्य जारी रहा। वर्तमान में इस भूमि पर व्यावसायिक भवन का निर्माण कराया जा रहा था, जिसमें स्विमिंग पूल बनाने के लिए गहरा गड्ढा भी खोदा गया था। जांच में यह भी सामने आया कि निर्माण में आसपास के ऐतिहासिक पत्थरों का उपयोग किया गया।
इस बीच एएसआई की रिपोर्ट ने दुर्ग क्षेत्र में वर्षों से जारी अतिक्रमण की गंभीर तस्वीर सामने रखी है। सर्वे के दौरान 209 से अधिक अवैध निर्माणों और अतिक्रमणों की पहचान की गई, जिनमें होटल, रेस्टोरेंट, हैंडीक्राफ्ट शोरूम, व्यावसायिक भवन, आवासीय विस्तार और बिना अनुमति कराए गए निर्माण कार्य शामिल हैं।
जिला कलक्टर डॉ. मंजू ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वर्ष 2020 के बाद बने सभी अवैध निर्माणों की जांच कर उनके खिलाफ प्राथमिकता से कार्रवाई की जाए। राजस्व विभाग के सत्यापन में 7 से 8 बड़े व्यावसायिक अतिक्रमण विशेष रूप से सामने आए हैं, जिन पर जल्द कार्रवाई की संभावना है।
एएसआई अधिकारियों के अनुसार दुर्ग क्षेत्र ‘प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958’ के तहत संरक्षित है। यहां बिना पूर्व अनुमति किसी भी प्रकार का निर्माण, पुनर्निर्माण, मरम्मत या विस्तार कार्य प्रतिबंधित है। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ जुर्माना और निर्माण हटाने का खर्च भी वसूला जा सकता है।
एएसआई के डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑर्गेनिस्ट मनोज द्विवेदी ने बताया कि अवैध निर्माणकर्ताओं को पहले नोटिस देकर सुनवाई का अवसर दिया गया था। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। उन्होंने बताया कि वर्ष 2004 में दुर्ग के भीतर 64 व्यावसायिक अतिक्रमण दर्ज थे, जो अब बढ़कर 69 हो चुके हैं।
हालांकि एएसआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि वर्ष 1992 से पहले बने आवासीय मकानों को फिलहाल ध्वस्त नहीं किया जाएगा। वहीं पक्के निर्माणों के खिलाफ बड़े स्तर की कार्रवाई के लिए केंद्रीय स्तर से मंजूरी की प्रक्रिया जारी है। मंजूरी मिलते ही दुर्ग क्षेत्र में व्यापक अतिक्रमण हटाओ अभियान शुरू किया जाएगा।
मौके पर अतिरिक्त क्लेक्टर रामचंद्र, उपखंड अधिकारी बीनू देवल,एडिशनल एसपी मुकुल शर्मा, डीएसपी बृजेश सिंह, आयुक्त नगर परिषद रविंद्र सिंह यादव,कोतवाली थानाधिकारी तुलसीराम प्रजापत, सदर थानाधिकारी प्रेमचंद, नगर परिषद राजस्व अधिकारी कमलेंद्र प्रताप सिंह एवं एएसआई के अधिकारी मौजूद रहे। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद अवैध निर्माण करने वालों और भू-माफियाओं में हड़कंप का माहौल है।
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Author: Ilyas
पिछले 10 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता







