चित्तौड़गढ़ रोडवेज आगार में मुख्यालय आदेशों की अवहेलना का आरोप,

मुख्य प्रबंधक पर निलंबन आदेश दबाने और कर्मचारी से ड्यूटी कराने के गंभीर आरोप
चित्तौड़गढ़। राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम के चित्तौड़गढ़ आगार में मुख्यालय जयपुर के आदेशों की अनदेखी का मामला सामने आया है। रोडवेज सेवानिवृत्त कर्मचारी संघ ने आरोप लगाया है कि मुख्यालय द्वारा जारी निलंबन आदेशों की पालना नहीं करते हुए एक निलंबित परिचालक से करीब एक माह तक नियमित ड्यूटी कराई गई।
जानकारी के अनुसार मुख्यालय जयपुर ने आदेश क्रमांक 308 दिनांक 30 अप्रैल 2025 के तहत चार परिचालकों को निलंबित करते हुए उनका मुख्यालय अन्य आगारों में परिवर्तित किया था। इसी आदेश में चित्तौड़गढ़ आगार के परिचालक प्रदीप सिंह को निलंबित कर उनका मुख्यालय राजसमंद आगार किया गया था।
संघ का आरोप है कि प्रदेश के अन्य आगारों ने आदेश की पालना करते हुए संबंधित कर्मचारियों को तत्काल कार्यमुक्त कर दिया, लेकिन चित्तौड़गढ़ आगार में निलंबित परिचालक को एक माह से अधिक समय तक मार्गों पर ड्यूटी पर भेजा जाता रहा। आरोप है कि मुख्य प्रबंधक एवं अधीनस्थ अधिकारियों की मिलीभगत से आदेश को दबाकर रखा गया।
मामले में नया मोड़ तब आया जब 3 जून 2025 को मुख्यालय द्वारा आदेश संख्या 415 जारी कर चारों परिचालकों को बहाल कर दिया गया। इसके बाद चित्तौड़गढ़ आगार प्रबंधन ने पुराने निलंबन आदेश पर बाद में हस्ताक्षर करवाकर यह दर्शाने का प्रयास किया कि आदेश की जानकारी देरी से प्राप्त हुई थी।
सेवानिवृत्त कर्मचारी संघ ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा है कि 30 अप्रैल से 3 जून 2025 के बीच संबंधित परिचालक की उपस्थिति पंजिका, मार्ग पत्रक तथा मुख्यालय से आदेश प्राप्ति के रिकॉर्ड की जांच कराई जाए। साथ ही दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
संघ ने चेतावनी दी कि यदि मुख्यालय आदेशों की इसी प्रकार अवहेलना होती रही तो निगम में अनुशासनहीनता और अराजकता का माहौल बन सकता है।
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Author: Ilyas
पिछले 10 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता








