गंगरार स्थित मेवाड़ यूनिवर्सिटी पर पहले ही मंत्री किरोड़ी लाल मीणा कर चुके हैं बड़े घोटालों का खुलासा,

50 हज़ार दे डिग्री डिप्लोमा ले….
चित्तौड़गढ़। जिले के गंगरार में स्थित मेवाड़ विश्वविद्यालय का नाम वर्षों से विवादों, फर्जीवाड़े और शिक्षा के व्यापारिकरण के लिए चर्चा में रहा है। ऐसे विश्वविद्यालय द्वारा प्रतिभा प्रोत्साहन समारोह का आयोजन कोई सामान्य बात नहीं, बल्कि अपने काले कारनामों को ढकने का प्रयास प्रतीत होता है। सबसे चिंताजनक यह कि शिक्षा विभाग ने खुद आदेश जारी कर विद्यालयों को अपने छात्र-छात्राओं को इस विवादित विश्वविद्यालय में भेजने का निर्देश दिया—यह आदेश पूरे शिक्षा जगत पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने खुद किया था “फर्जी डिग्री फैक्ट्री” का भंडाफोड़
गौरतलब है कि हाल ही में राज्य के कैबिनेट मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने मेवाड़ विश्वविद्यालय में छापामार कार्रवाई कर बड़ा खुलासा किया था।
• कृषि डिग्री और डिप्लोमा को लेकर विश्वविद्यालय में बड़े स्तर पर फर्जी परीक्षा और फर्जी पासिंग के प्रमाण मिले।
• कई छात्रों ने स्वीकार किया कि “50 हजार रुपये में एग्रीकल्चर डिग्री/डिप्लोमा घर बैठे मिल जाता है।”
• एक विद्यार्थी ने यह भी स्वीकार किया कि बिना किसी क्लास, प्रैक्टिकल या परीक्षा में बैठे ही उसे पास कर दिया गया।
मंत्री मीणा ने मौके पर कड़ी टिप्पणी की थी—
“ऐसे में विद्यार्थी क्या ज्ञान प्राप्त करेगा? उसे क्या पता चलेगा कि मृदा अपरदन क्या है, कौनसी फसल कब बोई जाती है, फसलों को रोगों से कैसे बचाया जाता है?”
यह सवाल केवल मेवाड़ विश्वविद्यालय की नहीं, बल्कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर चोट है।
फर्जी डिग्री, छात्रवृत्ति घोटाला, फर्जी प्रवेश—और अब सरकारी संरक्षण का आरोप
मेवाड़ विश्वविद्यालय पहले ही कई गंभीर मामलों में फंसा है—
• लगभग 100 करोड़ रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले में कुलगुरु अशोक गदिया की गिरफ्तारी
• एसओजी द्वारा फर्जी डिग्री जारी करने पर तीन वरिष्ठ अधिकारियों की गिरफ्तारी
• कृषि कोर्सों में सैकड़ों फर्जी प्रवेश और अवैध डिप्लोमा जारी करने का मामला
ऐसे संस्थान के लिए शिक्षा विभाग का “आदेश” जारी करना न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करता है कि—
क्या शिक्षा विभाग एक फर्जीवाड़े में लिप्त विश्वविद्यालय का संरक्षक बन चुका है?
प्रतिभा प्रोत्साहन समारोह—छवि सुधारने का दिखावटी प्रयास?
निजी विश्वविद्यालय की ओर से प्रतिभा प्रोत्साहन समारोह आयोजित करने को कई लोग “इमेज वॉशिंग” की कोशिश बता रहे हैं।
• जिलों से हजारों छात्रों को बुलाने की होड़
• जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी का प्रचार
• और शिक्षा विभाग का समर्थन
इन सबका उद्देश्य क्या सिर्फ घोटालों की बदबू को सुगंध में बदलना है?
शिक्षा विभाग का आदेश—किसके दबाव में जारी हुआ?
चित्तौड़गढ़ और प्रतापगढ़ के शिक्षा अधिकारियों ने प्रारंभ में विश्वविद्यालय की पैरवी की, बाद में पल्ला झाड़ते हुए कहा—
“हमें नहीं पता था… आगे ध्यान रखेंगे।”
लेकिन सवाल बरकरार है—
क्या बिना जानकारी के ऐसा आदेश जारी हो सकता है? और अगर जानकारी थी, तो किसके दबाव में?
राज्य के मंत्री छापेमारी करें और स्थानीय प्रतिनिधि मंच साझा करें—ये कैसी दोहरी नीति?
एक ओर राज्य के मंत्री खुद इस विश्वविद्यालय में चल रहे अवैध कार्यों पर धावा बोलते हैं,
वहीं दूसरी ओर स्थानीय विधायक और अधिकारी मंच पर उपस्थित होकर इसे “प्रतिभा” से जोड़ने की कोशिश करते हैं। यह विरोधाभास शिक्षा के भविष्य को संदेह में डालता है।
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Author: Ilyas
पिछले 10 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता










