कांग्रेस जिला अध्यक्ष पदभार ग्रहण समारोह में सियासी खींचतान तेज, गुटबाज़ी के संकेत और नेतृत्व पर उठे सवाल

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  • प्रमोद सिसोदिया ने संभाला पदभार,
  • उदयलाल आंजना के बयान से बढ़ी राजनीतिक चर्चा
  •  कार्यक्रम में कई वरिष्ठ नेता रहे नदारद

चित्तौड़गढ़, 07 दिसंबर। नवनियुक्त कांग्रेस जिला अध्यक्ष प्रमोद सिसोदिया ने रविवार को ज़िला कांग्रेस कमेटी के कार्यालय में विधिवत् पदभार ग्रहण किया।पदभार ग्रहण समारोह में उन्होंने कहा कि उन्हें यह जिम्मेदारी संगठन सृजन अभियान के अंतर्गत मिली है। उन्होंने बताया कि उनके राजनीतिक गुरु पूर्व मंत्री उदयलाल आंजना ने उन्हें प्रदेश नेतृत्व से मिलवाया था और भरोसा जताया था कि वह इस पद को जिम्मेदारी के साथ निभाएंगे।

सिसोदिया ने अपने संबोधन में कार्यकर्ताओं को मजबूत बनाने और उनके साथ न्याय करने को अपनी शीर्ष प्राथमिकता बताया। उन्होंने मंच से राष्ट्रीय नेतृत्व, प्रदेश प्रभारी, सह प्रभारी और सभी वरिष्ठ नेताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उन्हें यह जिम्मेदारी सीधे राहुल गांधी ने सौंपी है, और वे संगठन को बूथ से लेकर मंडल तक मजबूत करेंगे।

सिसोदिया ने कहा कि “चित्तौड़गढ़ के किसी नेता ने मुझे जिला अध्यक्ष नहीं बनाया है। कार्यकर्ता ही मेरा नेता है और मैं उनके बीच रहकर काम करूंगा।”
कार्यक्रम में कई वरिष्ठ नेता अनुपस्थित रहे, जिस पर उन्होंने जवाब दिया कि यह उनका निजी निर्णय था। उन्होंने कहा— “आज मैं जिला अध्यक्ष हूं, कल कोई और होगा। संगठन चलता रहता है।

कार्यकर्ताओं में उभरा असंतोष, आंजना की भूमिका पर सवाल

कार्यक्रम के बाद कई कार्यकर्ताओं की ओर से नाराज़गी भी सामने आई। उनका कहना है कि जिला अध्यक्ष की नियुक्ति पूरी तरह उदयलाल आंजना के प्रभाव से हुई है और पदभार समारोह भी आंजना समर्थक गुट द्वारा आयोजित था।
कार्यकर्ताओं ने तुलना करते हुए कहा कि इससे पहले भेरूलाल चौधरी के पदभार ग्रहण पर डाक बंगले में भव्य आयोजन हुआ था, जबकि इस बार आयोजन काफी सीमित रहा।

“कौन प्रत्याशी बनेगा, यह आंजना तय करेगा”— बयान से बढ़ी हलचल

कार्यक्रम के दौरान पूर्व मंत्री उदयलाल आंजना के बयान ने राजनीति को नया मोड़ दे दिया। उन्होंने मंच से कहा—
“किस विधानसभा में कौन प्रत्याशी बनेगा, यह उदयलाल आंजना तय करेगा।”

आंजना के बयान से गुटबाज़ी और गहरी

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री उदयलाल आंजना ने मंच से ऐसा बयान दिया, जिसने जिले में गुटबाज़ी की चर्चा को और हवा दे दी। आंजना ने कहा कि “लोग निंबाहेड़ा में उदयलाल आंजना का उत्तराधिकारी ढूंढने लग गए हैं, लेकिन अब प्रमोद सिसोदिया की राय से उदयलाल आंजना हर विधानसभा में उत्तराधिकारी तय करेगा।”

उनका यह कथन न केवल नेतृत्व संबंधी सवाल उठाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि संगठनात्मक निर्णयों में एकतरफा हस्तक्षेप बढ़ रहा है। कार्यकर्ताओं का मानना है कि मंच से दिए गए ऐसे बयान कांग्रेस को अंदर ही अंदर कमजोर करने और गुटबाज़ी को और गहरा करने का काम कर रहे हैं।

इस बयान के बाद कार्यकर्ताओं में चर्चा तेज हो गई कि यदि नेतृत्व चयन से लेकर राजनीतिक फैसले आंजना ही करेंगे, तो फिर प्रदेश प्रभारी, सह प्रभारी, जिला प्रभारी और हाईकमान की भूमिका क्या है?
उनका यह वक्तव्य कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान और नेतृत्व की दिशा को लेकर सवाल खड़े करता नजर आया।

कांग्रेस लंबे समय से चित्तौड़गढ़ में विभिन्न गुटों—
• जाड़ावत गुट
• आंजना गुट
• बेगूं के विधूड़ी गुट
• और अन्य स्थानीय समूहों
में बंटी हुई है।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या प्रमोद सिसोदिया सभी गुटों को साथ लेकर चल पाएंगे या गुटबाज़ी और गहराएगी।

आंजना का ‘पांचों सीटें जीतने’ का दावा, पर चुनौतियाँ गंभीर

पूर्व मंत्री आंजना पहले ही कांग्रेस हाईकमान से वादा कर चुके हैं कि वे जिले की पांचों विधानसभा सीटें जितवाकर देंगे। परंतु राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बढ़ती गुटबाज़ी इस लक्ष्य को कठिन बना सकती है।

मंच से लेकर कार्यकर्ताओं के बीच दिखाई पड़ी असहजता और असंतोष कांग्रेस की एकजुटता पर सवाल उठाती है।

आमंत्रित वरिष्ठ नेताओं की गैरमौजूदगी ने बढ़ाई चर्चाएँ

समारोह के लिए पूर्व मंत्री अशोक चांदना, अल्पसंख्यक प्रदेशाध्यक्ष अध्यक्ष एम.डी. चोपदार, पूर्व मंत्री रामलाल जाट, पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह विधूड़ी, सुरेंद्र सिंह जाड़ावत, और पूर्व जिलाध्यक्ष भेरूलाल चौधरी सहित कई वरिष्ठ नेताओं को आमंत्रित किया गया था, परंतु एक भी नेता उपस्थित नहीं हुआ।

उनकी अनुपस्थिति ने कांग्रेस की आंतरिक खींचतान और असंतोष की चर्चाओं को और हवा दी।

Ilyas

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Author: chittorgarhnews

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