शीतकालीन छुट्टियों के चलते हजारों सैलानी पहुंचे, जाम में थमी रफ्तार

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शीतकालीन अवकाश व रविवार के संयोग से दुर्ग पर उमड़ी रिकॉर्ड भीड़, यातायात व्यवस्था चरमराई

चित्तौड़गढ़। गौरव, शौर्य और भक्ति के जीवंत प्रतीक विश्व प्रसिद्ध दुर्ग पर रविवार को जनसैलाब उमड़ पड़ा। शीतकालीन अवकाश और रविवार की छुट्टी का दोहरा संयोग होने के कारण दुर्ग परिसर सुबह से ही देशी-विदेशी पर्यटकों से गुलजार नजर आया। हालांकि, सैलानियों की इस भारी आवक ने दुर्ग की यातायात व्यवस्था को पूरी तरह से चरमरा दिया।

 

शीतकालीन अवकाश शुरू होने से पहले ही दुर्ग पर सैलानियों की हलचल बढ़ने लगी थी, लेकिन रविवार को यह संख्या हजारों पार कर गई। ठंड के बावजूद पर्यटकों का उत्साह कम नहीं हुआ। विजय स्तंभ, कीर्ति स्तंभ, कुभामहल, मीरा मंदिर, पद्मिनी महल सहित अन्य ऐतिहासिक स्मारकों पर पर्यटकों की की खासी भीड़ देखने को मिली।

दुर्ग की सैर करते सैलानी।

 

राजस्थान के साथ-साथ गुजरात, दिल्ली, मध्य प्रदेश और बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक भी चित्तौड़ के इतिहास को निहारने पहुंचे। पर्यटकों की संख्या बढ़ने का सबसे नकारात्मक असर दुर्ग के संकरे रास्तों और ढलानों पर देखने को मिला। पाडन पोल से लेकर किले के नीचले भाग तक वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। पार्किंग स्थल फुल होने के कारण पर्यटकों ने रास्ते के किनारे वाहन खड़े कर दिए, जिससे दो तरफा यातायात पूरी तरह बाधित हो गया।

शहर के किला रोड़ पर लगा जाम।

 

इस जाम में न केवल पर्यटक फंसे रहे, बल्कि दुर्ग पर निवास करने वाले स्थानीय निवासियों को भी अपने रोजमर्रा के कामों के लिए भारी परेशानी उठानी पड़ी। अचानक बढ़ी भीड़ और वाहनों के दबाव के कारण पुलिस प्रशासन और होमगार्ड के जवानों को व्यवस्था संभालने में काफी पसीना बहाना पड़ा।

संकरी सड़कों पर बसों और बड़ी गाड़ियों के फंस जाने से स्थिति और विकराल हो गई। पुलिस को कई घंटों की मशक्कत के बाद यातायात को धीरे-धीरे सुचारू करने में सफलता मिली।

जहाँ एक ओर जाम ने परेशानी पैदा की, वहीं दूसरी ओर स्थानीय व्यापारियों के लिए यह रविवार सुपर संडे साबित हुआ। गाइड, हस्तशिल्प विक्रेता, ऑटो चालक और रेस्टोरेंट संचालकों के व्यापार में भारी तेजी देखी गई, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था में उत्साह का माहौल है।

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Ilyas
Author: Ilyas

पिछले 10 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता

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