Questions surround the budget for the Sanwaliyaji Fair. The chairman reports spending between 2 and 2.5 crore rupees (approximately $20 million to $25 million), while sources claim the figure reaches 6-7 crore rupees (approximately $60 million to $70 million).

चित्तौड़गढ़। मेवाड़ के प्रख्यात कृष्णधाम श्री सांवलियाजी में आयोजित होने वाले तीन दिवसीय जलझूलनी एकादशी मेले को लेकर मंदिर मंडल की ओर से प्रेस वार्ता आयोजित की गई। प्रेस वार्ता में मेले की तैयारियों, आयोजन और विभिन्न कार्यक्रमों पर होने वाले खर्च को लेकर मंदिर मंडल अध्यक्ष से सवाल किए गए।
मेले के बजट को लेकर पूछे गए सवाल पर मंदिर मंडल अध्यक्ष ने करीब 2 से 2.5 करोड़ रुपये के खर्च की जानकारी दी। हालांकि, दूसरी ओर सूत्रों के हवाले से मेले के तीन दिनों में होने वाला कुल खर्च करीब 6 से 7 करोड़ रुपये तक होने की बात सामने आ रही है। ऐसे में मेले के कुल बजट और अलग-अलग आयोजनों पर होने वाले खर्च को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
किस आयोजन पर कितना खर्च
प्रेस वार्ता में मेले के दौरान होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों, कलाकारों की प्रस्तुतियों, भजन संध्याओं, कवि सम्मेलन, आतिशबाजी, मंच व्यवस्था सहित अन्य व्यवस्थाओं पर होने वाले खर्च को लेकर भी सवाल किए गए। हालांकि, प्रत्येक आयोजन पर कितना खर्च प्रस्तावित है, इसका विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया।
हर वर्ष जलझूलनी एकादशी के अवसर पर श्री सांवलियाजी धाम में तीन दिवसीय मेले का आयोजन होता है। मेले में राजस्थान सहित देश के विभिन्न हिस्सों से लाखों श्रद्धालु सांवरिया सेठ के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
मेले को लेकर उत्साह, लेकिन खर्च के ब्योरे को लेकर उठ रहे सवाल
इस बार मेले में विशाल शोभायात्रा, जलझूलनी एकादशी पर रथयात्रा, भजन संध्याओं, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन सहित कई बड़े आयोजन प्रस्तावित हैं। बी. प्राक, शैलेश लोढ़ा और छोटू सिंह रावणा जैसे कलाकार भी कार्यक्रमों में आकर्षण का केंद्र रहेंगे।
मेले को लेकर श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में उत्साह है, लेकिन मेले के आय-व्यय और आयोजनवार खर्च का विस्तृत लेखा-जोखा सार्वजनिक नहीं किए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मंदिर मंडल की ओर से बताए गए 2 से 2.5 करोड़ रुपये के खर्च और सूत्रों द्वारा बताए जा रहे 6 से 7 करोड़ रुपये के अनुमान के बीच अंतर को लेकर भी स्थिति स्पष्ट किए जाने की मांग सामने आ रही है।
अब सवाल यह है कि तीन दिवसीय मेले का वास्तविक कुल बजट कितना है और अलग-अलग आयोजनों पर कितनी राशि खर्च की जा रही है? यदि आयोजनवार खर्च और कुल बजट का विस्तृत विवरण सार्वजनिक किया जाता है तो इन सवालों की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
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