चित्तौडगढ़। कोतवाली थाने में नकली खल बेचने का एक मामला दर्ज किया गया है, यह माल एक पिकअप गाड़ी में लाया गया था, जिसमें करीब 50 कट्टे भरे हुए थे। कोतवाली थानाधिकारी तुलसीराम ने बताया कि रामसहाय मालीवाल निवासी अयोध्यापुरी ने एक कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज करवाई है। रामसहाय राजाराम ट्रेडर्स के प्रोप्राइटर हैं और मोहनभोग ट्रेडमार्क वाली कपास्या खली के अधिकृत विक्रेता हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि चित्तौड़गढ़ में नकली खल बेची जा रही है, जो देखने में बिल्कुल असली मोहन भोग खल जैसी है, लेकिन असल में नकली है। इस सूचना पर रामसहाय मालीवाल के साथ उनके सहयोगी अमित जैन और कैलाश भंडारी मौके पर पहुंचे और उन्होंने गाड़ी में लदी खल के कट्टों की जांच की। जांच में उन्होंने पाया कि यह खल असली मोहन भोग ब्रांड की नहीं है, बल्कि नकली है। व्यापारी ने बताया कि नकली माल बेचने से न केवल व्यापारिक नुकसान हो रहा है, बल्कि ब्रांड की साख भी खराब हो रही है और इससे पशुओं के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि उन्हें विरचन्द नरसी कंपनी ने चित्तौड़गढ़ क्षेत्र में नकली माल की जांच और कानूनी कार्रवाई के लिए अधिकृत एजेंट नियुक्त किया है। पिकअप चालक राहुल यादव से पूछा कि यह माल कहां से लाया गया है, तो उसने बताया कि उसने यह खल सिद्धार्थ ट्रेडिंग कंपनी मावली से भरी है। चालक ने यह भी कहा कि वह कंपनी के मालिक शुभम छाजेड़ के निर्देश पर यह खल चित्तौड़गढ़ में सप्लाई करता था। अब रामसहाय मालीवाल ने इस पूरे मामले की शिकायत कर दी है। उनका कहना है कि इस तरह की खल से किसानों और पशुपालकों के साथ भी धोखा होता है, क्योंकि नकली खल का उपयोग पशुओं के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर माल जब्त कर लिया है। पुलिस ने पशु पालन विभाग के अधिकारियो को खल सेम्पलिंग की जांच कराने के नमूने दिये है, जिसके बाद नकली खल पाये जाने पर आगे जहा से माल आया उस संबंध में जाँच की जाएगी।

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