बारिश के बाद भी नहीं फीका पड़ा दशहरे का उत्साह, चित्तौड़गढ़ में भव्य आतिशबाजी के बीच हुआ रावण दहन

SHARE:

चित्तौड़गढ़ में बारिश के बीच हुआ रावण दहन, आयोजकों को करनी पड़ी मशक्कत

चित्तौड़गढ़। शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू होकर 20 अक्टूबर को विजयादशमी के अवसर पर रावण दहन के साथ संपन्न हुई। मंगलवार को शहर के इंदिरा गांधी स्टेडियम में बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक दशहरा उत्सव आयोजित किया गया। नगर परिषद की ओर से आयोजित कार्यक्रम में 71 फीट ऊंचे रावण तथा 51-51 फीट ऊंचे कुंभकरण और मेघनाद के पुतले आकर्षण का केंद्र रहे। हालांकि, शाम को हुई बारिश ने आयोजन की तैयारियों पर पानी फेर दिया। पुतलों के दहन के दौरान रिमोट कंट्रोल तकनीक ने भी पूरी तरह साथ नहीं दिया और आयोजकों को पुतलों में आग लगाने के लिए अतिरिक्त मशक्कत करनी पड़ी।

रिमोट का बटन दबाकर पुतला सुलगाते अतिथिगण।

 

रिमोट से दहन की शुरुआत, लेकिन बारिश ने बढ़ाई परेशानी

इस बार तीनों पुतलों का दहन पारंपरिक तरीके के बजाय डिजिटल और रिमोट कंट्रोल तकनीक से करने की व्यवस्था की गई थी। शाम को हुई बारिश के कारण पुतले गीले हो गए, जिससे उनके दहन में परेशानी आई। आयोजकों ने पुतलों को जलाने के लिए अलग से आतिशबाजी की व्यवस्था की और जरूरत पड़ने पर पेट्रोल का छिड़काव भी किया।

जलता हुआ मेघनाद का पुतला।

 

रात 8:24 बजे मेघनाद का पुतला दहन: मेघनाद के पुतले का दहन संत विनोद यति महाराज और संत दिग्विजय राम महाराज ने रिमोट कंट्रोल का बटन दबाकर शुरू किया। शुरुआत में पुतले में आग लगी, लेकिन कुछ देर बाद दहन की प्रक्रिया धीमी पड़ गई। इसके बाद आयोजकों ने आतिशबाजी और पेट्रोल के छिड़काव की मदद से पुतले को जलाने का प्रयास किया। करीब ढाई मिनट तक आतिशबाजी के साथ मेघनाद का पुतला जलता रहा।

रिमोट से सुलगाए कुम्भकरण का पुतला, आयोजकों को नीचे घुस के करनी पड़ी मशक्कत।

 

रात 8:29 बजे कुंभकरण के पुतले को लगाया गया रिमोट: इसके बाद कुंभकरण के पुतले का दहन रिमोट कंट्रोल से शुरू करने का प्रयास किया गया, लेकिन पुतले में आग नहीं लग पाई। इसके बाद आयोजकों ने आतिशबाजी और पेट्रोल के छिड़काव की मदद से पुतले को जलाया।

 

रावण के पुतले को सुलगाते ही निकली मुँह से रंगबिरंगी आग।

रात 8:36 बजे रावण दहन: रावण के पुतले का दहन शुरू होते ही उसके मुंह से रंग-बिरंगी आग और धुआं निकलने लगा। इस दौरान पूरा स्टेडियम जय श्रीराम के नारों से गूंज उठा। रावण का पुतला करीब पांच मिनट तक आतिशबाजी के साथ जलता रहा। बारिश के कारण आई बाधाओं के बावजूद आयोजकों के प्रयासों से कार्यक्रम संपन्न हुआ।

 आतिशबाजी से आसमान सतरंगी रोशनी से जगमगाया

दशहरा उत्सव में आतिशबाजी की जिम्मेदारी जोधपुर की अंसारी फायर वर्क्स को दी गई थी। रावण के सिर के ऊपर से हवाई आतिशबाजी की गई। पुतले की आंखों से अंगारे और मुंह से आवाज निकलने जैसे विशेष प्रभाव भी देखने को मिले। पुतलों के भीतर चक्कर और तेज आवाज वाले धमाकों की व्यवस्था की गई थी।

करीब 45 मिनट तक चले आतिशबाजी कार्यक्रम में जमीन और तीनों पुतलों को मिलाकर 5 हजार से अधिक फायरवर्क्स इस्तेमाल किए जाने का अनुमान था। आसमान में बिखरी सतरंगी रोशनी दर्शकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही।

मंच पर जयशिव रामायण मंडल के कलाकारों ने रामलीला मंचन कर मोहा दर्शकों का मन।

 

जय शिव रामायण मंडल ने किया रामलीला का मंचन

रावण दहन से पहले निंबाहेड़ा के जय शिव रामायण मंडल ने रामलीला का मंचन किया। नाट्य रूपांतरण के माध्यम से भगवान श्रीराम और रावण के प्रसंगों का मंचन कर दशहरे के महत्व को दर्शाया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में शहरवासी और आसपास के क्षेत्रों से आए दर्शक मौजूद रहे।

पुतले बनाने का काम बड़ी सादड़ी से आए श्रमिकों ने किया। ये श्रमिक पिछले छह वर्षों से चित्तौड़गढ़ में रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतले बनाने की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

संतों और अतिथियों का किया स्वागत

कार्यक्रम के दौरान नगर परिषद की ओर से संत दिग्विजय राम महाराज, संत विनोद यति महाराज और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गजेंद्र सिंह जोधा का स्वागत-अभिनंदन किया गया।

इस अवसर पर नगर परिषद सभापति अनिल ईनाणी, उपसभापति सुदर्शन रामपुरिया, आयुक्त रविंद्र सिंह यादव, भाजपा नेता हर्षवर्धन सिंह रुद, रवि विरानी, शहर अध्यक्ष गौरव त्यागी सहित भाजपा पार्षद और बड़ी संख्या में शहरवासी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के दौरान हजारों की संख्या में थे शहरवासी उपस्थित।
कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही तैनात

दशहरा उत्सव में हजारों दर्शकों की मौजूदगी को देखते हुए सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए। शहर डीएसपी बृजेश सिंह शेखावत, शहर कोतवाल रजनीश कुमार और सदर थाना प्रभारी प्रेम सिंह पुलिस जाब्ते के साथ तैनात रहे। सुरक्षा व्यवस्था के बीच कार्यक्रम संपन्न हुआ।

बारिश के कारण पुतलों के दहन में आई बाधाओं और रिमोट कंट्रोल से आग नहीं पकड़ने की परेशानी के बावजूद आयोजकों ने वैकल्पिक इंतजाम कर दशहरा उत्सव को पूरा कराया।

यह खबरें भी पढ़ें…

Leave a Comment

और पढ़ें