चित्तौड़गढ़ नगर परिषद में सभापति की कुर्सी पर किसका दावा मजबूत? भाजपा में चार नामों की चर्चा

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16 सितंबर को नामांकन से खुलेगा दावेदारों का पत्ता, 18 सितंबर को नाम वापसी व सिंबल आवंटन; 21 सितंबर को होगा सभापति का चुनाव

 

चित्तौड़गढ़। नगर परिषद चित्तौड़गढ़ के 60 वार्डों के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने बहुमत हासिल कर लिया है। अब चुनावी नतीजों के बाद शहर की राजनीति का अगला बड़ा सवाल नगर परिषद के सभापति को लेकर है। भाजपा में सभापति पद के लिए जहां चार नाम प्रमुख रूप से चर्चा में हैं, वहीं कांग्रेस में भी दो संभावित चेहरों को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है।

विधायक चंद्रभान सिंह आक्या के नेतृत्व में भाजपा ने नगर परिषद में बहुमत हासिल किया है। हालांकि विधायक पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि सभापति का चेहरा पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और संगठन के निर्देश के अनुसार तय किया जाएगा। ऐसे में अंतिम फैसला भाजपा नेतृत्व के स्तर पर होना माना जा रहा है।

भाजपा में चार नामों की चर्चा

अनिल ईनाणी—सबसे प्रबल दावेदारों में नाम

वार्ड नंबर 15 से निर्वाचित अनिल ईनाणी का नाम सभापति पद के प्रमुख दावेदारों में सबसे आगे बताया जा रहा है। ईनाणी भाजपा संगठन में महामंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। संगठनात्मक अनुभव और पार्टी से लंबे जुड़ाव को उनकी दावेदारी का मजबूत पक्ष माना जा रहा है।

सुदर्शन रामपुरिया—सामाजिक समीकरण साधने का विकल्प?

दूसरा प्रमुख नाम सुदर्शन रामपुरिया का है। वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ता और जैन समाज से जुड़े रामपुरिया भी सभापति पद की दौड़ में बताए जा रहे हैं। ऐसे में यदि पार्टी उन्हें जिम्मेदारी देती है तो इसे राजनीतिक और सामाजिक समीकरण साधने के कदम के तौर पर देखा जा सकता है।

छोटू सिंह शेखावत—अनुभव का मजबूत दावा

वार्ड नंबर 13 से निर्वाचित छोटू सिंह शेखावत भी सभापति पद के संभावित दावेदार हैं। वे पूर्व में नगर परिषद के उपनेता प्रतिपक्ष रह चुके हैं और चार बार पार्षद रहने का अनुभव रखते हैं। नगर परिषद की कार्यप्रणाली और स्थानीय राजनीति की समझ उनके पक्ष में मजबूत आधार मानी जा रही है।

शैलेन्द्र झंवर—बड़ी जीत और राजनीतिक नजदीकी

वार्ड नंबर 25 से भाजपा के शैलेन्द्र झंवर का नाम भी सभापति पद की दौड़ में चर्चा में है। उन्होंने भाजपा प्रत्याशियों में सबसे अधिक मतों के अंतर से जीत दर्ज की है। राजनीतिक हलकों में उन्हें विधायक चंद्रभान सिंह आक्या के करीबी नेताओं में भी गिना जाता है। ऐसे में उनकी दावेदारी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कांग्रेस में भी दो नामों की चर्चा

भाजपा के साथ-साथ कांग्रेस में भी सभापति पद के लिए संभावित चेहरों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। कांग्रेस की ओर से रमेश नाथ और धर्मेंद्र मूंदड़ा के नाम सामने आ रहे हैं।

वार्ड नंबर 4 से निर्वाचित रमेश नाथ कांग्रेस की ओर से संभावित दावेदार बताए जा रहे हैं। वहीं धर्मेंद्र मूंदड़ा का नाम भी सभापति पद की दौड़ में चर्चा में है।

हालांकि कांग्रेस की ओर से भी अभी किसी नाम पर आधिकारिक मुहर नहीं लगी है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि कांग्रेस की ओर से इनमें से कौन नामांकन दाखिल करता है या पार्टी किसी अन्य पार्षद को मैदान में उतारती है।

16 सितंबर को नामांकन से खुलेगा राज

भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों में फिलहाल जिन नामों की चर्चा है, उन्हें संभावित दावेदार माना जा रहा है। वास्तविक तस्वीर 16 सितंबर 2026 को नामांकन दाखिल होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

यानी भाजपा में चर्चा में चल रहे चार नामों में से कितने दावेदारी पेश करते हैं और कांग्रेस से कितने उम्मीदवार मैदान में उतरते हैं, इसका पता नामांकन के बाद चलेगा।

इसके बाद 18 सितंबर 2026 को नाम वापसी की तारीख है। इसी दिन सभापति और अध्यक्ष पद के उम्मीदवारों को चुनाव चिन्ह (सिंबल) आवंटित किए जाएंगे। इसके बाद चुनाव मैदान में मौजूद अंतिम उम्मीदवारों की तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी।

21 सितंबर को होगा फैसला

21 सितंबर 2026 को सभापति और अध्यक्ष पद के लिए चुनाव होगा। ऐसे में अगले कुछ दिन चित्तौड़गढ़ की स्थानीय राजनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।

भाजपा के सामने बहुमत के बावजूद सभापति के चेहरे को लेकर कई समीकरण हैं। पार्टी संगठनात्मक अनुभव, वरिष्ठता, सामाजिक समीकरण, पार्षदों के बीच स्वीकार्यता और राजनीतिक नेतृत्व की पसंद में से किसे प्राथमिकता देती है, यह देखने वाली बात होगी।

वहीं कांग्रेस के सामने संख्या बल के बीच सभापति पद के लिए मजबूत चेहरा उतारने की चुनौती होगी।

अब नजर नामांकन पर

फिलहाल भाजपा में अनिल ईनाणी, सुदर्शन रामपुरिया, छोटू सिंह शेखावत और शैलेन्द्र झंवर, जबकि कांग्रेस में रमेश नाथ और धर्मेंद्र मूंदड़ा के नाम संभावित दावेदारों के रूप में चर्चा में हैं।

लेकिन दावेदार कितने होंगे और कौन-कौन चुनाव मैदान में उतरेगा, यह 16 सितंबर के नामांकन के बाद ही स्पष्ट होगा। 18 सितंबर को नाम वापसी और सिंबल आवंटन के बाद मुकाबले की अंतिम तस्वीर सामने आएगी।

अब सभी की निगाहें 21 सितंबर पर हैं, जब सभापति चुनाव के साथ यह तय होगा कि चित्तौड़गढ़ नगर परिषद की नई कमान आखिर किसके हाथों में जाती है।

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