चित्तौड़गढ़। वीर तेजा दशमी महोत्सव के अवसर पर जिला जाट संस्थान की ओर से सोमवार को भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इस बार महिलाओं की बड़ी संख्या में सहभागिता रही और कलश यात्रा मुख्य आकर्षण बनी। इंदिरा गांधी स्टेडियम से प्रारंभ होकर शोभायात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरती हुई सती स्थित जाट छात्रावास पहुँची, जहाँ यह किसान सम्मेलन में परिवर्तित हुई।

किसान सम्मेलन में केंद्रीय मंत्रियों, सांसद और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने मंच साझा किया। कार्यक्रम के बाद 21 क्विंटल देसी घी से बने हलवे का प्रसाद के रूप में वितरण किया गया, जिसमें हजारों लोगों ने भाग लिया।
युवाओं का उत्साह, लेकिन सुरक्षा रही नदारद
शोभायात्रा में समाज के लोग, सैकड़ों युवा और बड़ी संख्या में वाहन शामिल रहे। ट्रैक्टर-ट्रॉली, बोलेरो, स्कॉर्पियो, थार और मोटरसाइकिलों का काफिला इस यात्रा में आकर्षण का हिस्सा बना। डीजे की धुन और बैंड-बाजों की थाप पर युवा जमकर नाचे।
लेकिन उत्साह और भीड़भाड़ के बीच सुरक्षा और अनुशासन पूरी तरह नदारद दिखा। जगह-जगह पर यातायात नियमों की धज्जियाँ उड़ाई गईं। कई युवाओं को बाइक पर बिना हेलमेट तीन सवारी करते हुए और सड़कों पर स्टंटबाज़ी करते हुए देखा गया। बोलेरो व जीप की बोनट और छत पर बैठकर भी युवक सफर कर रहे थे, जो किसी बड़े हादसे को न्योता देने जैसा था।
पुलिस व्यवस्था पर उठे सवाल
सबसे चिंताजनक पहलू यह रहा कि तमाम चौराहों पर तैनात पुलिसकर्मी और यातायात पुलिस के जवान तमाशबीन बने रहे। प्रताप सर्कल, कलेक्टर चौराहा, बिल्ला चौराहा और प्रतापनगर चौराहा सहित कई जगहों पर युवाओं ने खुलेआम स्टंट किए, लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हुआ। एक जगह तो कुछ युवक शहर डीएसपी से भी उलझ पड़े, इसके बावजूद पुलिस की भूमिका निष्क्रिय ही दिखी।
आम नागरिकों में सवाल उठ रहे हैं कि जब साधारण दिनों में बिना हेलमेट या तीन सवारी करने पर चालान काट दिया जाता है, तो ऐसे बड़े आयोजनों में खुलेआम नियमों की अनदेखी क्यों की जाती है? यह दोहरा रवैया न केवल पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि आम जनता के लिए असुरक्षा की भावना भी पैदा करता है।
जाम से आमजन त्रस्त
शोभायात्रा के दौरान कई मार्गों पर घंटों लंबा जाम लगा रहा। एंबुलेंस और स्कूल बसें तक इस जाम में फँस गईं। यह स्थिति दर्शाती है कि प्रशासन ने पूर्व तैयारी या वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था करने की जहमत नहीं उठाई। यदि ऐसी स्थिति में कोई गंभीर मरीज या आपातकालीन स्थिति सामने आ जाती तो बड़ा संकट खड़ा हो सकता था।
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