The 30th three-day annual Urs of Hazrat Syed Gulab Shah Mastan (Kale Baba Sahib) concluded with the ‘Kul ki Fatiha’.

कपासन, 29 जुलाई। निकटवर्ती खात्याखेड़ी स्थित हजरत सैयद गुलाब शाह मस्तान (र.अ.) उर्फ काले बाबा साहब का 30वां तीन दिवसीय सालाना उर्स बुधवार को कुल की फातिहा के साथ श्रद्धा एवं अकीदतपूर्ण माहौल में संपन्न हो गया। उर्स के समापन अवसर पर बड़ी संख्या में जायरीन दरगाह शरीफ पहुंचे और चादर व फूल पेश कर देश में अमन-चैन, खुशहाली और भाईचारे की दुआएं मांगी।
दरगाह के गादीनशीं एडवोकेट सैयद अशफाक अली एवं सैयद ऐजाज अली ने बताया कि तीन दिवसीय उर्स के दौरान विभिन्न धार्मिक एवं रूहानी कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें दूर-दराज से आए अकीदतमंदों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
उर्स के अंतिम दिन महफिल-ए-मिलाद के बाद महफिल-ए-समां का आयोजन हुआ, जिसमें देश के प्रसिद्ध कव्वालों ने सूफियाना कलाम पेश कर उपस्थित जायरीनों को रूहानी सुकून प्रदान किया। इसके बाद परंपरा के अनुसार रंग की महफिल सजाई गई, जिसमें सभी कव्वालों ने सामूहिक रूप से अमीर खुसरो की मशहूर कव्वाली “आज रंग है री माँ, रंग है री, मोहे पीर पायो निजामुद्दीन औलिया” प्रस्तुत की। सूफियाना कलाम की गूंज से पूरा आस्ताना-ए-आलिया रूहानी रंग में रंग गया और जायरीन अकीदत में सराबोर होकर झूम उठे।
उर्स का समापन कुल की फातिहा ख्वानी के साथ हुआ। इस दौरान देश-दुनिया में शांति, भाईचारे, तरक्की और इंसानियत की सलामती के लिए विशेष दुआ की गई।
फातिहा ख्वानी के पश्चात दरगाह शरीफ में विशाल आम लंगर का आयोजन किया गया, जिसमें सभी जायरीन एवं अकीदतमंदों को तबर्रुक वितरित किया गया। इसी के साथ हजरत सैयद गुलाब शाह मस्तान (र.अ.) उर्फ काले बाबा साहब का 30वां तीन दिवसीय सालाना उर्स श्रद्धापूर्वक संपन्न हो गया।
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कपासन के निकट खात्याखेड़ी स्थित हजरत सैयद गुलाब शाह मस्तान (र.अ.) उर्फ काले बाबा साहब का 30वां तीन दिवसीय सालाना उर्स कुल की फातिहा के साथ संपन्न हुआ। उर्स के अंतिम दिन महफिल-ए-मिलाद, महफिल-ए-समां, रंग की महफिल, फातिहा ख्वानी एवं विशाल आम लंगर का आयोजन हुआ। बड़ी संख्या में जायरीनों ने दरगाह शरीफ पहुंचकर चादर व फूल पेश किए और देश में अमन-चैन, भाईचारे एवं खुशहाली की दुआ मांगी।
Author: Ilyas
पिछले 10 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता






