शराब दुकानों के ‘गुप्त रास्ते’ पर सवाल: क्या पुलिस और आबकारी विभाग को नहीं दिखते ये छेद?

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चित्तौड़गढ़।  ऐतिहासिक और पर्यटन नगरी के रूप में पहचान रखने वाले शहर में अब शराब ठेकेदारों और उनके कर्मचारियों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि वे पर्यटकों के साथ मारपीट करने से भी नहीं डर रहे। रेलवे स्टेशन क्षेत्र में शनिवार रात हुई घटना ने शहर की कानून व्यवस्था के साथ-साथ पर्यटन छवि पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बताया जा रहा है कि रात 8 बजे बाद भी शराब बिक्री जारी थी। इसी दौरान बाहर से आए दो पर्यटकों और ठेके के कर्मचारियों के बीच विवाद हुआ, जो देखते ही देखते मारपीट में बदल गया। सबसे गंभीर बात यह है कि यह सब शहर के सबसे व्यस्त और संवेदनशील इलाके में हुआ, जहां रोजाना हजारों यात्री और पर्यटक आते-जाते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर में कई शराब ठेकों पर तय समय के बाद भी चोरी-छिपे शराब बेचना आम बात बन चुकी है।

आबकारी कार्यालय के सामने कुछ मीटर दूर ही स्थित एक शराब के ठेका खुला शटर, व साइड चौकोर आकार में शटर कटा हुआ है।

 

चित्तौड़गढ़ शहर में रात 8 बजे बाद शराब बिक्री पर प्रतिबंध केवल कागजों तक सीमित नजर आ रहा है। हकीकत यह है कि कई शराब दुकानों पर शटर बंद होने के बावजूद शराब बिक्री का खेल खुलेआम जारी रहता है। कहीं शटर के नीचे छोटी “नाली” बना दी गई है तो कहीं शटर को काटकर ऐसा हिस्सा तैयार किया गया है, जहां से रात होते ही किसी जादुई जिन्न की तरह शराब की बोतलें बाहर निकलती रहती हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पुलिस और आबकारी विभाग के अधिकारियों को ये छेद और गुप्त रास्ते दिखाई नहीं देते? शहरवासियों का कहना है कि यह सब लंबे समय से चल रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग अनजान बने हुए हैं। इससे साफ तौर पर कार्रवाई की गंभीरता पर सवाल उठ रहे हैं।

रेलवे स्टेशन क्षेत्र में पर्यटकों और शराब ठेका कर्मचारियों के बीच हुई मारपीट की घटना ने इस पूरे नेटवर्क की पोल खोल दी है। लोगों का कहना है कि जब तय समय के बाद चोरी-छिपे शराब बेची जाएगी तो विवाद और अपराध बढ़ना तय है। इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर केवल औपचारिक कार्रवाई ही दिखाई देती है।

 

चित्तौड़गढ़। मुख्य रेलवे स्टेशन के द्वार के बाहर स्थित शराब की दुकान के शटर के नीचे नालीनुमा बना गुप्त रास्ता जहां से रात 8 बजे के बाद शराब की बोतल प्रकट होती है। पास में ही सेल्समैन कुर्सियां लगा कर बैठते है।

 

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि रात के समय कई शराब दुकानों के बाहर असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे आम लोगों और यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। खासकर पर्यटन नगरी चित्तौड़गढ़ में ऐसी गतिविधियां शहर की छवि को नुकसान पहुंचा रही हैं।

अब सवाल केवल अवैध शराब बिक्री का नहीं, बल्कि जिम्मेदार विभागों की जवाबदेही का भी है। यदि ये छेद और अवैध तरीके आम लोगों को साफ दिखाई दे रहे हैं, तो फिर कार्रवाई करने वाली एजेंसियों को क्यों नहीं? यही बात अब शहर में चर्चा और सवालिया निशान का विषय बनी हुई है।

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Ilyas
Author: Ilyas

पिछले 10 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता

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