Is there a conspiracy behind Shankaracharya’s insult? Jadaavat questions BJP’s silence

चित्तौड़गढ़/प्रयागराज। प्रयागराज में मौनी अमावस्या के अवसर पर स्नान को लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद एवं उनके शिष्यों के साथ हुई कथित धक्का-मुक्की और अभद्र व्यवहार के मामले को लेकर पूर्व राज्यमंत्री सुरेंद्रसिंह जाड़ावत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की चुप्पी पर सवाल खड़े किए हैं।
जाड़ावत ने कहा कि जिस राज्य में भाजपा की सरकार है, वहां पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ इस तरह का व्यवहार अत्यंत निंदनीय है। उन्होंने आरोप लगाया कि शंकराचार्य एवं उनके बटुकों के साथ मारपीट की गई, वहीं उन्हें यह तक कहकर नोटिस दिए जा रहे हैं कि वे शंकराचार्य नहीं हैं, जबकि पूर्व में भाजपा सरकार के दौरान स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके चरणों में नतमस्तक होकर आशीर्वाद लेते रहे हैं।
पूर्व राज्यमंत्री ने कहा कि हिंदुत्व का दावा करने वाली भाजपा इस पूरे मामले पर मौन क्यों है। शंकराचार्य के समर्थन में बड़ी संख्या में उनके अनुयायी प्रयागराज पहुंच रहे हैं और घटना का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य की प्रमुख मांगों में गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध और भारत में हो रहे गोमांस व्यापार को रोकना शामिल है, लेकिन इस मुद्दे पर चित्तौड़गढ़ सहित अन्य स्थानों पर हिंदू सम्मेलन निकालने वाले संगठन भी चुप्पी साधे हुए हैं।
जाड़ावत ने सवाल उठाया कि क्या हिंदू धर्म केवल चुनाव के समय ही याद आता है। उन्होंने बताया कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद इस घटना को लेकर धरने पर बैठे हैं और सार्वजनिक रूप से माफी की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को इस घटना के लिए माफी मांगनी चाहिए थी और शंकराचार्य को सम्मानपूर्वक स्नान कराने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए थी।
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