चित्तौड़गढ़, 30 अक्टूबर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशानुसार राज्य सरकार द्वारा सड़कों एवं भवन निर्माण कार्यों की गुणवत्ता तथा पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से “सघन निरीक्षण अभियान” 1 नवम्बर से 30 नवम्बर 2025 तक चलाया जाएगा। इस संबंध में मुख्य सचिव सुधांश पंत द्वारा आदेश जारी किए गए हैं।

आदेशानुसार, प्रदेश में भवनों एवं सड़कों के निर्माण तथा मरम्मत कार्य विभिन्न विभागों के माध्यम से संचालित किए जाते हैं। समय-समय पर इन कार्यों की गुणवत्ता से संबंधित शिकायतें प्राप्त होती रहती हैं। ऐसे में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न विभागों हेतु निरीक्षण समितियों का गठन किया गया है।
जिला कलक्टर आलोक रंजन ने बताया कि चित्तौड़गढ़ जिले में भी इस अभियान के तहत संबंधित विभागों के कार्यों का विस्तृत निरीक्षण किया जाएगा। निरीक्षण समितियां निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, मानकों और तकनीकी बिंदुओं की जांच कर अपनी रिपोर्ट जिला कलक्टर को प्रस्तुत करेंगी।
उन्होंने बताया कि प्राप्त निरीक्षण रिपोर्टों को उनकी अभिशंसा सहित संबंधित विभाग के प्रभारी सचिव को प्रेषित किया जाएगा, ताकि भविष्य में कार्यों की गुणवत्ता और अधिक सुदृढ़ की जा सके।
निरीक्षण समितियों का गठन सार्वजनिक निर्माण विभाग, नगरीय विकास एवं आवास, स्वायत्त शासन विभाग तथा समग्र शिक्षा अभियान के भवन कार्यों के लिए किया गया है।
सार्वजनिक निर्माण विभाग के कार्यों हेतु अधीक्षण अभियंता (अन्य वृत से) और अधिशाषी अभियंता (अन्य जिले के गुणवत्ता नियंत्रण खंड से) समिति में शामिल किए जाएंगे।
नगरीय विकास एवं आवास तथा स्वायत्त शासन विभाग के कार्यों हेतु अधीक्षण अभियंता, अधिशाषी अभियंता (गुणवत्ता नियंत्रण खंड) और अधिशाषी अभियंता (नगरीय विकास या स्वायत्त शासन विभाग) समिति में रहेंगे।
इसी प्रकार समग्र शिक्षा अभियान के भवन कार्यों हेतु अधीक्षण अभियंता (संबंधित वृत), अधिशाषी अभियंता (गुणवत्ता नियंत्रण खंड) और अधिशाषी अभियंता (समग्र शिक्षा अभियान) समिति में रहेंगे।
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या यह निरीक्षण केवल कागजों तक सीमित रहेगा या वास्तव में सड़कों की हकीकत सामने लाएगा?
शहर में हाल ही में बनी कई सड़कों की स्थिति तो पहले ही दो दिन की मामूली मावट में उजागर हो चुकी है। नई बनी सड़कें उखड़ने लगी हैं, वहीं जगह-जगह किए गए पेचवर्क कार्य भी टूटकर उखड़ गए हैं। ऐसे में आमजन सवाल उठा रहे हैं कि क्या यह निरीक्षण समिति वास्तव में इन स्थलों का निष्पक्ष परीक्षण करेगी या फिर हर साल की तरह केवल औपचारिकता निभाई जाएगी।
हर वर्ष सड़कों और भवनों की गुणवत्ता जांचने के लिए अभियान चलाए जाते हैं, रिपोर्टें भी बनती हैं, लेकिन उन पर ठोस कार्रवाई कितनी होती है—यह आज भी बड़ा सवाल है। क्या इस बार सरकार और प्रशासन इन रिपोर्टों के आधार पर दोषी ठेकेदारों और अधिकारियों पर सख्त कदम उठाएंगे, या फिर एक बार फिर अभियान सिर्फ फाइलों में सिमट कर रह जाएगा?
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