“भक्ति का समंदर उमड़ा श्री सांवलिया जी में… लेकिन करोड़ों की तैयारियों पर उठे पारदर्शिता के सवाल”

SHARE:

चित्तौड़गढ़/मंडपिया।
मेवाड़ के सुप्रसिद्ध कृष्णधाम श्री सांवलिया जी, मंडफिया में इस वर्ष भी तीन दिवसीय जलझूलनी एकादशी मेला 2 से 4 सितंबर तक बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ आयोजित किया जा रहा है। इस अवसर पर विशाल मेले में भव्य रथ यात्राएं, भजन संध्याएं, कवि सम्मेलन, सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं आतिशबाजी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगी।

मंदिर मंडल की मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं अतिरिक्त जिला कलक्टर (प्रशासन) प्रभा गौतम ने बताया कि जलझूलनी एकादशी मेले का शुभारंभ मंगलवार 2 सितंबर को दोपहर सवा 12 बजे होगा। दोपहर 2 बजे विशाल शोभायात्रा निकाली जाएगी। उसी दिन रात्रि 9 बजे रेफरल चिकित्सालय परिसर स्थित स्टेज पर अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन का आयोजन होगा, जिसमें देशभर के ख्यातनाम कवि अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करेंगे।

तीन दिवसीय कार्यक्रमों की झलक

2 सितंबर : भव्य शोभायात्रा, अखिल भारतीय कवि सम्मेलन, भजन संध्या और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां।

3 सितंबर (जलझूलनी एकादशी) : ठाकुर जी 500 किलो रजत रथ पर नगर भ्रमण करेंगे और सांवलिया सरोवर में श्रीविग्रह का स्नान होगा। शोभायात्रा के पुनः आगमन पर रंगारंग आतिशबाजी होगी। इस दिन हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा भी की जाएगी।

4 सितंबर : समापन समारोह, दिव्यांगजनों को मोटराइज्ड स्कूटी वितरण और प्रतिभावान विद्यार्थियों का सम्मान। साथ ही सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और भजन संध्याएं।


रथयात्रा में नासिक ढोल, भटिंडा आर्मी बैण्ड, कच्ची घोड़ी और कालबेलिया नृत्य आकर्षण का केंद्र रहेंगे। मेले के दौरान मंदिर को रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया है, जो श्रद्धालुओं को दूर से ही आकर्षित कर रहा है।

मंदिर मंडल का दावा :

मंदिर मंडल और प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि प्रतिदिन 8 से 10 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इसको देखते हुए पार्किंग, पेयजल, रोशनी, मंच और दर्शन व्यवस्था की विशेष तैयारियां की गई हैं।

करोड़ों के खर्च के बावजूद पारदर्शिता और व्यवस्था पर उठ रहे सवाल:

जहां एक ओर तीन दिवसीय जलझूलनी एकादशी मेला पूरे धूमधाम और आस्था के साथ आयोजित हो रहा है, वहीं दूसरी ओर मंदिर मंडल और प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं।

निविदाओं में पारदर्शिता का अभाव

हर साल करोड़ों रुपए खर्च किए जाते हैं, लेकिन पार्किंग, मंच, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और अन्य ठेकों की निविदाएं सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित नहीं की जातीं। किस ठेकेदार को कितनी राशि पर काम सौंपा गया, इस पर प्रशासनिक स्तर पर स्पष्टता नहीं मिलती। सूचना मांगने पर भी संतोषजनक जवाब न मिलने से भ्रष्टाचार की आशंका बनी रहती है।

 

श्रद्धालुओं की कठिनाइयां

करोड़ों खर्च होने के बावजूद श्रद्धालुओं को निःशुल्क भोजन या प्रसाद की सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जाती। लड्डू और मठरी प्रसाद भी 35-40 रुपये देकर ही खरीदने पड़ते हैं। दर्शन व्यवस्था अव्यवस्थित होने से श्रद्धालुओं को धक्का-मुक्की और लंबी कतारों का सामना करना पड़ता है।

पिछले वर्ष की घटनाएं

गत वर्ष मेले में लगाए गए बाउंसरों द्वारा श्रद्धालुओं और महिलाओं से धक्का-मुक्की व मारपीट की घटनाएं सामने आई थीं। लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई है।

श्रद्धालुओं की अपेक्षा: 

श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर मंडल को चाहिए कि सभी निविदाओं और खर्च का ब्यौरा सार्वजनिक रूप से प्रकाशित किया जाए। गरीब भक्तों के लिए भोजन और प्रसाद की निःशुल्क व्यवस्था हो। दर्शन व्यवस्था और सुरक्षा में सुधार किया जाए।

निविदाओं में पारदर्शिता का अभाव – भ्रष्टाचार के आरोप

श्री सांवलिया सेठ मंदिर मंडल हर वर्ष मेले की व्यवस्थाओं और आयोजन पर लगभग 3 से 4 करोड़ रुपए खर्च करता है। इस बजट में पार्किंग, मंच निर्माण, सांस्कृतिक कार्यक्रम, कलाकारों के पारिश्रमिक, स्टॉल आवंटन, बाउंसरों की नियुक्ति, सुरक्षा, बिजली-पानी और अन्य व्यवस्थाओं पर बड़े पैमाने पर ठेके दिए जाते हैं।

लेकिन इन ठेकों और खर्चों की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठते रहे हैं।

निविदाओं को लेकर पारदर्शिता नहीं अपनाई जाती। अधिकांश ठेके बिना अखबार में खुला प्रकाशन किए या फिर सीमित जानकारी साझा कर दिए जाते हैं।

मंदिर मंडल और प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया जाता कि किस कार्य के लिए कितनी निविदाएं जारी हुईं, किन कंपनियों/व्यक्तियों ने आवेदन किया और किसे आखिरकार ठेका दिया गया।

आम जनता और श्रद्धालुओं को यह जानकारी तक नहीं मिल पाती कि करोड़ों का बजट आखिर कहां और किस मद में खर्च हो रहा है।

कई बार सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगी गई, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिलने के आरोप हैं।

स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि निविदाओं की प्रक्रिया को अखबारों और आधिकारिक पोर्टल पर प्रकाशित किया जाए, तो भ्रष्टाचार की आशंकाओं को रोका जा सकता है। लेकिन अब तक मंदिर मंडल की ओर से ऐसा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

इस अपारदर्शिता के कारण ही यह आरोप लगते रहे हैं कि –

ठेकेदारों की पहले से सेटिंग कर, मनचाहे लोगों को काम दिलाया जाता है। बड़े बजट का एक हिस्सा वास्तव में काम पर खर्च न होकर जेबों में चला जाता है।

जिन कामों पर लाखों-करोड़ों का खर्च दर्शाया जाता है, उनमें कई बार गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

आरोप लगाने वालों का कहना है कि जब श्रद्धालुओं से प्रसाद तक के लिए 35-40 रुपये लिए जा रहे हैं और फिर भी उन्हें मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही हैं, तो यह साफ है कि करोड़ों का बजट अपनी जगह सही उपयोग में नहीं आ रहा।

यह खबरें भी पढ़ें…

 

Ilyas
Author: Ilyas

पिछले 10 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता

Leave a Comment

और पढ़ें