चित्तौड़गढ़/उत्तरकाशी, 08 अगस्त 2025 — उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के हर्षिल घाटी स्थित धराली गांव में सोमवार को आई प्राकृतिक आपदा ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। दो पहाड़ों के बीच फंसे एक भारी बादल के गर्म हवा से टकराकर फटने से खीरगंगा नदी में अचानक आई बाढ़ ने देखते ही देखते पूरे गांव को मलबे में बदल दिया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, महज कुछ सेकंडों में आई इस प्रलय में 200 से अधिक मकान, होटल और कई मंदिर मलबे और पानी में बह गए। यहां तक कि धराली गांव और आसपास के कई घर भी पूरी तरह नष्ट हो गए। ISRO के सैटेलाइट चित्रों में साफ दिखाई दे रहा है कि अब धराली का अधिकांश हिस्सा अस्तित्व में नहीं है—लगभग 20 हेक्टेयर क्षेत्र 36 करोड़ घन मीटर मलबे के नीचे दब चुका है।

भारी जनहानि और बचाव कार्य
अभी तक 10 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 50 से 100 लोग लापता बताए जा रहे हैं। सेना, ITBP, SDRF और NDRF की संयुक्त टीमें चिनूक और Mi-17 हेलीकॉप्टरों की मदद से राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं। भागीरथी नदी के किनारे अस्थायी झील बनने और आगे हरसिल गांव में भी खतरा बढ़ने की आशंका को देखते हुए निगरानी बढ़ा दी गई है।
मानव लापरवाही भी जिम्मेदार
विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक मार्गों पर अतिक्रमण, नदियों और नालों के किनारे होटल-रिज़ॉर्ट जैसे निर्माण कार्य इस तरह की आपदाओं को और भयावह बना देते हैं। पहाड़ों में जल निकासी के प्राकृतिक मार्ग को रोकना किसी भी भारी बारिश या बादल फटने को प्रलय में बदल सकता है।
सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए केंद्र और राज्य स्तर पर हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। उत्तराखंड सरकार ने आपदा प्रभावित क्षेत्र का हवाई सर्वे कर राहत शिविर और मुआवजा प्रक्रिया शुरू कर दी है। आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, राहत कार्य में अभी कई दिन लग सकते हैं क्योंकि कई इलाकों तक पहुंचना बेहद कठिन है।
धराली आपदा एक चेतावनी
धराली की यह तबाही सिर्फ एक प्राकृतिक घटना नहीं, बल्कि यह चेतावनी है कि पहाड़ों की नाजुक पारिस्थितिकी के साथ छेड़छाड़ महंगी पड़ सकती है। प्रकृति के साथ सहजीवन और सतर्क विकास ही भविष्य में ऐसी त्रासदियों से बचाव का रास्ता है।
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Author: Ilyas
पिछले 10 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता








