चित्तौड़गढ़ में आचार्य 108 पुलक सागर महाराज का भव्य मंगल प्रवेश, बोले- चित्तौड़ शौर्य, स्वाभिमान और बलिदान की पावन भूमि

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Grand and auspicious entry of Acharya 108 Pulak Sagar Maharaj into Chittorgarh; he remarked, “Chittor is the sacred land of valor, self-respect, and sacrifice.”

चित्तौड़गढ़, 7 जुलाई। सकल दिगंबर जैन समाज एवं मुनि सेवा समिति के तत्वावधान में राष्ट्रसंत, क्रांतिकारी जैन आचार्य श्री 108 पुलक सागर जी महाराज ससंघ का मंगलवार को चित्तौड़गढ़ नगर में भव्य एवं ऐतिहासिक मंगल प्रवेश हुआ। नगर प्रवेश के दौरान श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा और पूरे मार्ग पर श्रद्धाभाव का वातावरण देखने को मिला।

मीडिया प्रभारी चंद्रेश जैन ने बताया कि अहिंसा सर्कल से कलेक्ट्री मार्ग, एसबीआई बैंक, सीके एसबी तथा मांगलिक धाम तक विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से गुरुदेव का पाद प्रक्षालन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। शहरभर में स्वागत द्वार सजाए गए तथा जैन समाज, भीलवाड़ा जैन समाज और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने पुष्पवर्षा कर गुरुदेव का अभिनंदन किया। इस अवसर पर समाज के अनेक व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे और बड़ी संख्या में समाजजन पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए।

महामंत्री नवीन कुमार पाटनी ने बताया कि प्रातः 9 बजे ज्ञान गंगा महोत्सव का शुभारंभ भव्य प्रवचन सभा के साथ हुआ। मुनि सेवा समिति के पदाधिकारियों ने श्रीफल भेंट कर गुरुदेव का स्वागत किया। धर्मसभा में समाज के विभिन्न परिवारों ने श्रद्धापूर्वक पाद प्रक्षालन किया, वहीं समाज अध्यक्ष पारस सोनी ने शास्त्र भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया। आयोजन के दौरान स्थानीय पुलिस प्रशासन एवं मीडिया का भी सराहनीय सहयोग रहा।

अपने प्रवचन में आचार्य श्री 108 पुलक सागर महाराज ने कहा कि चित्तौड़गढ़ केवल एक किला नहीं, बल्कि शौर्य, स्वाभिमान, भक्ति, त्याग और बलिदान की पावन भूमि है। उन्होंने कहा कि इस धरती का प्रत्येक कण वीरता की गाथा सुनाता है और समाज को सम्मान, धर्म एवं स्वाभिमान की रक्षा के लिए सदैव प्रेरित करता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से चित्तौड़ के आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।

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Author: chittorgarhnews

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