After many years, Meera Mahotsav became a festival for the people, devotional music and classical dance captivated the hearts.
चित्तौड़गढ़ के श्रीनाथ गार्डन में सांस्कृतिक संध्या, मीरा मंदिर में भक्ति रसोत्सव का आयोजन; देशभर के कलाकारों ने दी मनमोहक प्रस्तुतियां

चित्तौड़गढ़। भक्त शिरोमणि मीराबाई की कृष्णभक्ति और मेवाड़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को समर्पित 35वें मीरा महोत्सव-2026 में भक्ति, संगीत और भारतीय शास्त्रीय कलाओं का अनूठा संगम देखने को मिला। मीरा स्मृति संस्थान की ओर से आयोजित तीन दिवसीय महोत्सव के दूसरे दिन श्रीनाथ गार्डन में सांस्कृतिक संध्या और तीसरे दिन चित्तौड़ दुर्ग स्थित मीरा मंदिर में भक्ति रसोत्सव आयोजित किया गया। कई वर्षों बाद महोत्सव जन-जन का आयोजन बनकर सामने आया, जिसमें शहरवासियों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की।
सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ गोविंद गदिया, संस्थान के संरक्षक सत्यनारायण समदानी, अध्यक्ष अर्जुन मुंदडा, कार्यक्रम संयोजक अनंत समदानी, सचिव राकेश मंत्री और कोषाध्यक्ष विनायक द्विवेदी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम की शुरुआत गणेश वंदना से हुई। इसके बाद भक्ति संगीत और नृत्य प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
चित्तौड़गढ़ के कैलाश गंधर्व एवं उनके सहयोगी कलाकारों ने सुमधुर भक्ति गीत प्रस्तुत किए। वहीं, रविन्द्रनाथ टैगोर ग्रुप ऑफ कॉलेज और मेवाड़ विश्वविद्यालय, गंगरार के कलाकारों ने आकर्षक नृत्य प्रस्तुतियों से भारतीय संस्कृति और कलात्मक परंपराओं की झलक दिखाई।
सांस्कृतिक संध्या का विशेष आकर्षण मेवाड़ विश्वविद्यालय की ओडिसी नृत्यांगना डॉ. कुंजलता मिश्रा की प्रस्तुति रही। उन्होंने पारंपरिक मुद्राओं, भावाभिव्यक्ति और लयबद्ध संचालन से दर्शकों को प्रभावित किया। दिल्ली की चंद्रकला एकेडमी ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स की कथक नृत्यांगना दिव्या गौड़ा एवं उनके सहयोगी कलाकारों ने कथक की लयकारी, पद संचालन और भावपूर्ण अभिव्यक्ति से कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए।
महोत्सव के तीसरे दिन रविवार सुबह चित्तौड़ दुर्ग स्थित ऐतिहासिक मीरा मंदिर में भक्ति रसोत्सव आयोजित हुआ। यहां कैलाश गंधर्व और दिल्ली की भजन गायिका विधि शर्मा ने मीरा के पदों एवं कृष्णभक्ति से ओतप्रोत भजनों की प्रस्तुतियां दीं। भजनों से मंदिर परिसर भक्तिमय हो गया और श्रद्धालुओं को मीराबाई के प्रेम, समर्पण और अनन्य कृष्णभक्ति का अनुभव हुआ।
भक्ति रसोत्सव में मेवाड़ पुनर्जागृति संस्थान, चित्तौड़गढ़ के कलाकारों ने मीरा भावनृत्य के माध्यम से मीराबाई के जीवन, साधना और श्रीकृष्ण के प्रति उनकी अटूट आस्था को भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया। दिल्ली के कथक कलाकार सदानंद विश्वास तथा बेंगलुरु के नादस्वरी दिव्य भूषण एवं उनके सहयोगी कलाकारों की प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं।
इस वर्ष मीरा महोत्सव की खास बात यह रही कि आयोजन ने सांस्कृतिक कार्यक्रम की सीमाओं से आगे बढ़कर शहर की आस्था, सांस्कृतिक चेतना और ऐतिहासिक विरासत को जन-जन से जोड़ने का कार्य किया। मीरा के भजनों, भावनृत्य और शास्त्रीय कलाओं के माध्यम से मेवाड़ की गौरवशाली परंपराओं को नई ऊर्जा मिली।
संस्थान के मीडिया प्रमुख मनोज पारीक ने बताया कि महोत्सव का उद्देश्य मीराबाई की भक्ति और सांस्कृतिक विरासत को व्यापक स्तर पर जन-जन तक पहुंचाना है। कार्यक्रम का संचालन लीला आगाल ने किया तथा आभार संस्थान के सचिव राकेश मंत्री ने व्यक्त किया।
इस अवसर पर कार्यसमिति सदस्य अमरकंठ उपाध्याय, विट्ठल पांडे, प्रदीप दीक्षित, जेपी भटनागर, एडवोकेट प्रदीप काबरा, अनुराग द्विवेदी, नरोत्तम राणावत, सुनील मालीवाल, डीपी चतुर्वेदी, राशि मुंदडा, रेखा समदानी, ओमप्रकाश औदिच्य, अभिषेक मुंदडा सहित संस्थान के सदस्य उपस्थित रहे।








